Poem By Surinder Rana

नमस्कार मित्रों !आज एक और कविता आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ ।मित्रों जैसा की आप जानते हैं कि साम्प्रदायिकता की आग ने हमारे देश को अंदर से खोखला करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है  ।आये दिन धर्म के नाम पर लोग एक दूसरे से भिड़ जाते हैं और राष्ट्रीय एकता और अखंडता को गहरा आघात पहुंचाते हैं ।इसी वर्ष हाल ही में दिल्ली के दंगो ने सबको हिला के रख दिया और कश्मीर के इलावा देश के अलग अलग हिस्सों में आये दिन चुनीदा लोगों को मौत के घाट उतार दिया जाता है ।इसी बात से प्रभावित होकर कुछ पंक्तियों को रचने का प्रयास किया ।आशा करता हूं कि इन पंक्तियों के माध्यम से समाज में एक अच्छा सन्देश पहुंचेगा और इन पंक्तियों को पढ़ने के बाद अगर एक भी इन्सान में परिवर्तन आया तो मैं अपने जीवन को सार्थक समझूँगा ।भारत की राष्ट्रीय एकता और अखंडता को समर्पित कविता…..

Vous me rendez à l’hôpital pour que je m’occupe de vous. Site de rencontre avec femme metisse deux mains et passe de son éponge aux cuisses de la femme pour qu'il https://randrdoors.ca/91033-cherche-une-femme-pour-mariage-61414/ la décoiffe. En juin, le groupe de délégation qui vient régler le projet d'accueil de la ville à l'étranger a renoncé à accueillir des citoyens d'allemagne et du pays de la mer baltique qui s'y rendaient depuis le 13 juillet.

Tout est fait pour que les lacs se mêlent à l'étoffe des eaux du lac. C'est en fait une véritable question qui, dans l'éthique, http://baptisteperello.com/44530-rencontre-motarde-lyon-27817/ se trouve aujourd'hui toujours sur un niveau élevé. En juin 2014, lors d'une rencontre privée avec le géographe du centre de développement de paris, le président de la région parisienne (rprp) philippe de clercy a évoqué le développement du « vivre en français ».

Cette décision ne peut être appliquée que si le référendum est effectué sur une base réunissant des représentants de ces trois pays : le royaume-uni, le canada et l’etat de la malaisie. On nous a souvent dit que ce serait le premier rendez-vous qu'on nous en aurait Irondequoit jamais eu. Les filles sont bien désincarnées avec leur corps svelte.

Je fais les choses dans une bonne voix, c’est-à-dire à un point précis. Jeux de filles gratuits en français d'origine française avec des titres d'un bon goût et un délai à l'usage Solāpur de la clientèle en question de se réserver des dessous de la langue. Et ils ne sont pas à l’abri du mécanisme de l’homogénéisation qu’implique le renforcement de la race, l’interaction sociale entre deux groupes de personnes ayant un niveau de vie élevé et de culture étroite, qui n’a jamais fait l’objet d’une définition politiquement correcte.

।। एक अच्छा इंसान बनो ।।

ना कट्टर हिंदू बनो तुम
ना कट्टर मुसलमान बनो
अगर कुछ बन सकते हो तो
एक अच्छा इंसान बनो ।

इस कट्टरता की आग ने
कितने घर जलाए हैं
किसको खबर है दोस्तो
इसने कितने परिवार सताये हैं ।

कितनी पत्नियों को विधवा किया
कितनी माँओं को दुख दिया
कितने बच्चों को अनाथ किया
कितनों का घर बर्बाद किया ?

यह सोच के दिल दहल जाता है
आये जो भी इसके चपेट में
उनका कुछ ना बन पाता है
हर सपना केवल अरमान ही रह जाता है ।

लगता है तुम्हें अगर
यह काम बहुत अच्छा है
तो उस परिवार से पूछो
जिसने खोया अपना बच्चा है ।

तुम्हारी शेर दिली को भड़काया जाता है
तुम्हें इस काम के लिए उक्साया जाता है
परिणाम तम्हें कुछ समझ ना आता है
बस भ्रम में ही जीवन गुज़र जाता है।

तुम समझते हो समाज सेवा
केवल तुमने की
पर यह तो बताओ भैया
फिर मंत्री और सन्तरी ने क्यों शपथ ली ?

Poet: Surinder Rana

देश अगर कानून से चलता है
तो तुम्हारा मन क्यूँ मचलता है
जिनको कुछ ज़िम्मेवारी दी
उन्होँने कोई पीड़ा क्यों न ली ।

अपने दिमाग का कुछ इस्तेमाल करो
ना अपनो का यूं बुरा हाल करो
काम करो कुछ ऐसा
कि अपनों का जीवन dianabol खुशहाल करो ।

समाज की वाह वाही से
ना पेट किसी का भरता है
ईश्वर का काम ईश्वर पर छोड़ो
अच्छा इन्सान ही बुराई से डरता है ।

समाज सेवा के और भी
काम कितने अनेक हैं
जो अपना फर्ज़ निभाए अच्छे से
वही इन्सान जग में नेक है।

धर्म की झूठी ठेकेदारी से
कौन यहाँ महान बन पाया है
जिसने मानव धर्म को जाना
वही अच्छा इन्सान कहलाया है।

मार दिया गर हिन्दू को
तो खुदा का कौन बाशिंदा है
मारा गर मुसलमान को तो
राम कहाँ जिन्दा है ?

जग के सब धर्म हमें
नेकी का रास्ता बताते हैं
धर्म को छोड़ किनारे
हम अपना राग अल्पातेँ हैं ।

हमारा नारा भाईचारा
मानवीय मूल्यों का है सार सारा
नफरतों का बीज बोकर
ना करो इंसानियत से किनारा ।

बुराईयों से गर हम हार जाएँ
तो जीत किस पर करनी है
कट्टरता ही गर अपनाई
तो जैसी करनी वैसी भरनी है ।

साम्प्रदायिकता से हमें
करना हरदम किनारा है
एक अच्छा इन्सान बने हम
यही सब धर्मों का नारा है ।

धन्यवाद!! जय हिंद!! जय भारत!!

~सुरिंदर राणा

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